प्रिय मित्रो विकलांग जनो की हालात आज दयनीय से दयनीय होती जा रही है कहने को तो कानून ही कानून ही विकलांगजनो के लिए पर सच बताईये क्या किसी का एक प्रतिशत लाभ भी मिल रहा जरा गौर करिये किसी और वर्ग के लिए अलग नियम बनते ही लागू और लाभ मिलना शुरू चाहे sc st एक्ट हो महिला से सम्बंधित कानून हो परन्तु विकलांग जनो को अपने लिए ही बने कानून को लागू करवाने के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ता है जैसे कल हमारे मित्र और विकलांग अधिकारो के प्रति संघर्षरत श्री बलराज विश्नोई जी ने कहा की विकलांगो को मिला है तो आश्वासन पर आश्वासन और तारीख पर तारीख मैं सहमत हूँ उनकी बात से आप बताईये सरकार विकलांगो के प्रति इतनी उदासीन क्यों है क्यों नही गंभीरता से लेती विकलांग जनो को ,मित्रो सबसे बड़ा कारण हम आप ही हैं मित्रो हम कब समझेंगे की हम अलग अलग कुछ भी नही कर सकते कुछ भी हासिल नही होगा हर कोई अपनी ढपली अपना राग करेगा तो क्या होगा हर किसी का अपना मापदंड अपना तरीका अपना संगठन तो विकलांग कहा गए विकलांगो का एकीकरण कहा गया मित्रो आज जरूरत है एक होने की किसी और के लिए नही अपने लिए तो एक हो जाइए अपने अपने संगठन चलिए अपनी नीतियां भी चलिए पर विकलांगो के कल्याण के राष्ट्रव्यापी मुद्दों पर तो अपना स्वार्थ और मेरा पराया छोड़ सकते है उत्तराखंड के संदीप अरोरा जी विकलांग अधिकारो के प्रति समर्पित है उन्हें भी इस बात का मलाल है मित्र हर वो विकलांग जो अपने अधिकारो को चाहता है वो एकता के पक्ष में है बस जरूरत है हमे आपको आगे बढ़ कर कार्य करने की वरना उनके पास तो 10 लोग है उनके पास तो 100 है मेरे पास हज़ार है इसी में हम फसे रह जायेंगे मित्रो सब हमारे है हम सबके है ये ठान लीजिऐ
आईये एक साथ हुंकार भरे विकलांग एकता जिंदाबाद
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सोमवार, 8 दिसंबर 2014
विकलांग जन की एकता
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