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बुधवार, 31 दिसंबर 2014

नये साल का अभिनन्दन है

नये साल का अभिनन्दन है...
नये साल का स्वागत करके, नूतन आस जगाने दो।
कल क्या होगा, कौन जानता, मन की प्यास बुझाने दो।

क्या खोया, क्या पाया कल तक, अनुभव के संग ज्ञान यही।
इसी ज्ञान से कल हो रौशन, यह विश्वास बढ़ाने दो।

जो न सोचा, हो जाता है, नहीं हारते वीर कभी।
सच्ची कोशिश, प्रतिफल अच्छा, बातें ख़ास बताने दो।

कल आयेगा, बीता कल भी, नहीं किसी पर वश अपना।
अपने वश में वर्तमान बस, यह आभास कराने दो।

जितने काँटे मिले सुमन को, बढ़ती है उतनी खुशबू।
खुद का परिचय संघर्षों से, यह एहसास कराने दो।

2 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे आपकी कविता बहुत अच्छी लगी और आपने कविता में जैसी जान डाल दी वह बहुत रोचक है साथ ही ये मन को एक शक्ति प्रदान करने वाली है

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  2. मुझे आपकी कविता बहुत अच्छी लगी और आपने कविता में जैसी जान डाल दी वह बहुत रोचक है साथ ही ये मन को एक शक्ति प्रदान करने वाली है

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