आज विकलांग जनों के प्रति सरकार का नजरिया क्या है ये समझना बहुत जरुरी है देश को आजाद हुए लगभग 67 साल हो गए पर क्या विकलांग जन आज वास्तव में आजाद हैं? क्या आम नागरिको के बराबर हक सुबिधा है ? क्या देश के निर्माण में विकलांगो की पूर्ण भागीदारी है ? आईये बिन्दुवार समझते हैं
1- आज जब देश में डिजिटल क्रांति की बात हो रही है ऑनलाइन विकास की बात हो रही है तो आज भी विकलांग जन को एक अदद प्रमाण पत्र के लिए अस्पताल के बाबुओं के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे क्यों नही ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किये जा रहे
2-देश में BPL APL की सूची है पर पुरे देश के विकलांग जनों का कोई राष्ट्रीय डाटा क्यों नही है
3-देश में सभी को शिक्षा का अधिकार है फिर विकलांग जनों के लिए प्रत्येक विधालय में स्थाई विशेष शिक्षक की व्यवस्था क्यों नही है
4-विकलांग जनों को सरकार तथाकथित पेंशन देती है वो पेंशन विकलांग जनों के लिए कितनी लाभप्रद है कभी इसकी समीक्षा की गयी क्या एक छोटे से प्रस्ताव को लाकर अपना भत्ता बढ़ा लेने वाले हमारे जनप्रतिनिधि भी इस पर खामोश है क्यों ?
5-सरकार विकलांग के कल्याण के लिए तमाम योजनाएं घोषित करती रही है पर क्या कभी देखा गया की इन का कितना लाभ पात्र विकलांगो को मिलता हैं
6-क्या विकलांग जन सरकार की नजर में केवल दीन हीन दया के पात्र भर है जिनको आश्वासन की चटनी दे कर मलाई दुसरो की थाली में परोस दिया जाता है
7-विकलांग जन को राजनैतिक अवसर से सदैव वंचित रखा गया है क्यों देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में विकलांगो के लिए अवसर है क्या उनका अलग प्रकोष्ठ है क्या अगर कही है भी तो विकलांगो को कितनी भागीदारी मिली है
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सोमवार, 10 नवंबर 2014
विकलांगो के प्रति सरकार का नजरिया
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